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man ke vichar

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aartisharma


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“पहले प्यार का मीठा एहसास”

Posted On: 7 Feb, 2014  
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Contest Entertainment Hindi Sahitya Junction Forum में

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आधी अधूरी सी ये ज़िन्दगी…….contest

Posted On: 9 Jan, 2014  
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Contest Hindi Sahitya कविता में

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“ज़िन्दगी”contest

Posted On: 9 Jan, 2014  
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Contest Hindi Sahitya कविता में

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आस्था Jagran Junction Forum

Posted On: 13 Nov, 2013  
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Career Celebrity Writer Contest Entertainment में

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मेरी दिल्ली !!..(व्यंग्य)

Posted On: 10 Nov, 2013  
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Career Celebrity Writer Contest Entertainment में

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हिंदी सम्मानजनक भाषा “Contest”

Posted On: 18 Sep, 2013  
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Business Career Celebrity Writer Contest में

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चाँद सा रोशन चेहरा …

Posted On: 12 Sep, 2013  
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Career Celebrity Writer Contest Entertainment में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: aartisharma aartisharma

के द्वारा: रमेश भाई आँजना रमेश भाई आँजना

के द्वारा: जयप्रकाश सोमई जयप्रकाश सोमई

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: Rahul Vaish Rahul Vaish

कुँए का मेढ़क बना देश का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया देश के महाभ्रष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (महाभ्रष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इसलिए क्यों की उसका उल्लेख मैं अपने पूर्व के ब्लॉग में विस्तारपूर्वक कर चूका हूँ अत: मेरे पूर्व के ब्लॉग का अध्यन जागरणजंक्शन.कॉम पर करे ) के उन न्यूज़ चैनलों को अपने गिरेबान में झाँक कर देखना चाहिए जो न्यूज़ चैनल के नाम के आगे ”इंडिया” या देश का नॉ.१ इत्यादि शब्दों का प्रयोग करते है. क्यों की इन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कुँए के मेढकों का न्यूज़ चैनलों का राडार या तो एन.सी.आर. या फिर बीमारू राज्य तक सीमित रहता है. कुए के मेढ़क बने इन न्यूज़ चेंनलो को दिल्ली का “दामिनी” केस तो दिख जाता है लेकिन जब नागालैंड में कोई लड़की दिल्ली के “दामनी” जैसी शिकार बनती है तो वह घटना इन न्यूज़ चैनलों को तो दूर, इनके आकाओं को भी नहीं मालूम पड़ पाती. आई.ए.एस. दुर्गा नागपाल की के निलंबन की खबर इनके राडार पड़ इसलिए चढ़ जाती हैं क्यों की वो घटना नोएडा में घटित हो रही है जबकि दुर्गा जैसी किसी महिला अफसर के साथ यदि मणिपुर में नाइंसाफी होती है तो वह बात इनको दूर-दूर तक मालूम नहीं पड़ पाती है कारण साफ़ है की खुद को देश का चैनल बताने वाले इन कुँए का मेढ़क इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का कोई संबाददाता आज देश उत्तर पूर्व इलाकों में तैनात नहीं है. देश का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिस तरह से न्यूज़ की रिपोर्टिंग करता है उससे तो मालूम पड़ता है की देश के उत्तर पूर्व राज्यों में कोई घटना ही नहीं होती है. बड़े शर्म की बात है की जब देश के सिक्किम राज्य में कुछ बर्ष पहले भूकंप आया था तो देश का न्यूज़ चैनल बताने वाले इन कुँए का मेढ़क न्यूज़ चैनलों के संबाददाताओं को सिक्किम पहुचने में २ दिन लग गए. यहाँ तक की गुवहाटी में जब कुछ बर्ष पहले एक लड़की से सरेआम घटना हुई थी तो इन कुँए के मेढक न्यूज़ चैनलों को उस घटना की वाइट के लिए एक लोकल न्यूज़ चैनल के ऊपर निर्भर रहना पड़ा था. इन न्यूज़ चैनलों की दिन भर की ख़बरों में ना तो देश दक्षिण राज्य केरल, तमिलनाडु, लक्ष्यद्वीप और अंडमान की ख़बरें होती है और ना ही उत्तर पूर्व के राज्यों की. हाँ अगर एन.सी.आर. या बीमारू राज्यों में कोई घटना घटित हो जाती है तो इनका न्यूज़ राडार अवश्य घूमता है. जब देश के उत्तर पूर्व या दक्षिण राज्यों के लोग इनके न्यूज़ चैनलों को देखते होंगे तो इन न्यूज़ चैनलों के द्वारा देश या इंडिया नाम के इस्तेमाल किये जा रहे शब्द पर जरुर दुःख प्रकट करते होंगे. क्यों की देश में कुँए का मेढ़क बने इन न्यूज़ चैनलों को हमारे देश की भौगोलिक सीमायें ही ज्ञात नहीं है तो फिर ये न्यूज़ चैनल क्यों देश या इंडिया जैसे शब्दों का प्रयोग करते है आखिर क्यों नहीं खुद को कुँए का मेढक न्यूज़ चैनल घोषित कर लेते जब ये आलसी बन कर देश बिभिन्न भागों में घटित हो रही घटनाओं को दिखने की जहमत नहीं उठाना चाहते है. धन्यवाद. राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड विजेता), एम. ए. जनसंचार एवम भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत फेसबुक पर मुझे शामिल करे- vaishr_rahul@yahoo.कॉम और Rahul Vaish Moradabad

के द्वारा: Rahul Vaish Rahul Vaish

के द्वारा: aartisharma aartisharma

के द्वारा: aartisharma aartisharma

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के द्वारा: डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश ) डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

आरती शर्मा जी आपने सही लिखा है कि "जनता हमेशा ही नेताओं के गैर-कानूनी कृत्यों से वाकिफ रही है लेकिन उसके पास इन नेताओं को स्वीकार करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होता. इसलिए गलत काम करने वाले को बिना सजा दिलवाए आप कोई परिवर्तन नहीं कर सकते'' हम सब जानते हैं कि सरकारी कर्मचारी से नेता तक कौन कितना भ्रष्ट है किन्तु इसे साबित करने के लिए हमारे पास १. सबूत नहीं है २. हम अपने ही रोजी रोटी के चक्कर में उलझे हुए हैं ३. सबूत होने के बावजूद या तो उसे पेश करने की हिम्मत नहीं है या समय नहीं है ४. डरते हैं कि यदि सबूत पेश हुआ तो हमारा काम रुक जाएगा ५. हम अपना काम तुरंत करवाने के लिए उलझन में पड़ना नहीं चाहते और खुद भी भ्रष्टाचार का हिस्सा बन जाते है. ऐसे ही कई मुद्दे हैं जिनके कारण वाकिफ होते हुए भी हम चुप बैठे हैं . आज जागरूकता की नहीं किन्तु भ्रष्टाचार के उन्मूलन की जरूरत है . इसे कैसे जड़ से उखाड़ा जाए व इन उपायों को किस तरह कार्य रूप में परिवर्तित किया जाए इसकी आवश्यकता है. इसके लिए सबूतों सहित भ्रष्टाचारियो के कारनामों को उजागर कर सबके सामने लाना तथा दंड दिलाना होगा. अपना कुछ समय निकालकर हर शहर में ८-१० लोगों के कुछ जुट बना कर भन्डा फोड़ निस्वार्थ संस्थापनों की स्थापना करनी होगी. जिसका काम होगा गलत कामों का सबूत इकट्ठा करना तथा भ्रष्टाचार से पीड़ित लोगों की मुफ्त सहायता करना. अपने विचारों को सुंदर ढंग से पेश करने के लिए बधाई .

के द्वारा: psudharao psudharao

के द्वारा: aartisharma aartisharma

के द्वारा: Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" Anil Kumar "Pandit Sameer Khan"

चुनाव के दौरान पार्टी अपना सबकुछ झोंकने के चक्कर में पैसे के खर्च की कतई परवाह करती नहीं दिखती। प्रचार के लिए पदाधिकारियों की फौज को भेजने के लिए उड़नखटोलों की लाइन लगी रहती है। अपनी पार्टी के प्रचार प्रसार के लिए नेता उसके विज्ञापन, होर्डिग्स इत्यादि में खर्चने से परहेज नहीं करते हैं। होर्डिग्स इत्यादि में नेताजी की तस्वीर के लिए खास किस्म के फोटो सेशन का दौर चलता है। राजनीतिक दलों के खर्चों की बानगी हाल ही में कोलकाता में आयोजित समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक के दौरान दिखी। उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों से सैकड़ों किमी की हवाई यात्रा से नेतागण कोलकाता पहुंचे। वे यहां के महंगे पांचतारा होटलों में रुके। जिन पांच तारा होटलों में समाजवादी पार्टी के नेता ठहरे थे, उन होटलों के एक कमरे के 24 घंटे का किराया कम से कम करीब 10,000 रुपये है। इन होटलों में लंच या फिर डिनर पर कम से कम 3,000 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च होते हैं। ये पैसा उद्योगपतियों से आता है और जीतने के बाद वो इसका दोगुना तीनगुना निकाल लेते हैं ! बढ़िया लेखन

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: jai jai

आदरणीय आरती जी आपकी माता पिता की बात से पूर्णतः सहमत होते हुये क्षमा माँगते हुये निवेदन करना चाहूँगा कि अधिकांश  धर्मों के शास्त्रों  की तरह, हमारे वेदों में भी कहा गया है कि ईश्वर एक  है और  निराकार है, उसके जैसा दूसरा नहीं है और न ही उसका प्रतिरूप ही बनाया जा  सकता है। सर्वशक्तिमान  ईश्वर में भी अपना प्रतिरूप बनाने का सामर्थ  नहीं है। वह न तो जन्म ले सकता है और न ही उसकी कभी मृत्यु हो सकती है। अतः मेरा मानना है कि शिव, गणेश, विष्णु  आदि महापुरुष, महर्षि तथा देवता हो सकते हैं किन्तु  वेदों के हिसाब से ईश्वर नहीं। यदि आपको लगे कि मैं गलत  हूँ तो कृपया मार्ग  दर्शन  करें।

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: aartisharma aartisharma




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