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"पहले प्यार का मीठा एहसास"

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वो लम्हा मेरी ज़िन्दगी का सबसे खुबसूरत और यादगार लम्हा बन गया जब मैं उनसे पहली बार मिली थी.हमारा मिलना एक पल का नही सात जन्मों का बंधन बन गया और मैंimages (1) उसमे बन्ध गई.उसकी ख़ुशी में मेरी ख़ुशी और गम में मेरा गम छिपा था.हर आहट जैसे उसके आने का पैगाम देती थी. फिजाओं में रंग उसी से थे.प्यार का उमड़ता सैलाब था उसकी आँखों में.वो एक अनछुई सी मोहब्बत थी.
रातभर उसे याद करते हुए करवटें बदलना. उसकी मीठी और प्यार भरी बातें कानों में मिश्री घोल देती थी.फ़ोन की हर घंटी पर लगता था जैसे मैं बस उसी को सुनना चाहती हूँ, वो मुझे याद कर रहा है और दिल पूरी रफ़्तार से धडकने लग जाता था,मानो जैसे अभी अभी धड़कना सीखा हो.उसकी आवाज़ पूरे बदन में सनसनी पैदा कर रोंगटे खड़े कर देती थी. बहुत कुछ कहना चाहती थी मैं पर जुबान साथ नही देती थी और बोलने का काम साँसे करती थी. बिना बोले मेरी साँसों की लय से ही वो समझ जाते थे की मैं क्या कहना चाहती हूँ. असीम प्यार झलकता था जब वो मेरा नाम लेते थे,ऐसा लगता था जैसे पहली बार अपना नाम सुना हो.दिल बार बार यही कहता था…
आँखें खुलें तो दीदार में उनके,
बंद हो तो ख्वाब हों उनके,
दिल धड़के तो नाम पे उनके,
साँसें रुके तो सामने उनके,
बोलूं तो लब पर नाम है उनका,
चुप रहूँ तो ज़हन मे ख्याल उनका,
जीयूं तो बहाना है प्यार उनका,
मरुँ तो लगे साथ नाम है उनका..
आँखों में काज़ल होठों पे लाली जैसे सब उन्ही के लिए है . अजीब सी बेसुधी छाई रहती थी उन दिनों.ये आँखें बार बार भीड़ में उन्ही का चेहरा खोजती रहती थी और दिल से पूछती थी “ऐ दिले-नादाँ तुझे हुआ क्या है, बता तेरे इस दर्दे-दिल की दवा क्या है”. पर दिल सिवाय धड़कने के कुछ जानता ही नही था.आती-जाती हर सांस पर जैसे उनका ही नाम था.,आँखों में सपने उन्ही के थे, अधरों पर नाम केवल उन्ही का था.कान जैसे उनके सिवा किसी को सुनना ही नही चाहते थे और दिल भी उन्ही के नाम पर धड़कने लगा था.बहुत प्यारा अहसास था वो दुनिया जन्नत लगने लगी थी और मैं अपने आप को किसी अप्सरा से कम नही समझती थी.दिल को छूती उनकी बातें और उनकी महकती साँसों की खुशबु ने मेरा जीवन रंगों से भर दिया.चारों तरफ बस वो और मैं ही थे.वो मेरी ज़िन्दगी में सावन की फुहार की तरह आये और प्रेमरस से मेरी ज़िन्दगी लबालब भर दी,जीने के मायने मिल गये थे मुझे.किसी ने सच ही कहा है “इतनी शिद्धत से न चाहना किसी को ऐ दोस्त,ज्यादा गहराई में जाने वाले अक्सर डूब जाया करते है “और मैं भी भी जैसे उनके प्यार में इस कदर डूब गई की हर समय उनके दीदार के लिए आँखें तरसती थी.मेरी ज़िन्दगी को किनारा मिल गया,जीने का सहारा मिल गया .आज वही मुझे जीवन साथी के रूप में मिला है उसे पाकर मेरा जीवन धन्य हो गया…
(आरती शर्मा)



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 22, 2014

अत्यंत कोमल भावनाओं का शब्द दर शब्द सुंदर विन्यास ,उत्कृष्ट रचना , बधाई प्रिय आरती शर्मा .

    aartisharma के द्वारा
    February 26, 2014

    धन्यवाद आदरणीय Nirmala Singh Gaur मैंम ..आभार

Shweta Misra के द्वारा
February 15, 2014

खूबसूरत शब्द विन्यास ……..इस उत्कृष्ट रचना के लिए और विजेता बनने के लिए बधाई

    aartisharma के द्वारा
    February 16, 2014

    आपका तहेदिल से शुक्रिया शिल्पा जी..आभार

पहले प्यार के मीठे अहसास की मनमोहक प्रस्तुति..हृदय को छू जाने वाली..हार्दिक बधाई..शुभकामनाये..

    aartisharma के द्वारा
    February 16, 2014

    होस्लाफ्ज़ाही के लिए सहृदय आभार आदरणीया शिल्पा जी..सादर

sadguruji के द्वारा
February 15, 2014

इस उत्कृष्ट रचना के लिए और ” जिंदगी का दूसरा नाम हो तुम ” प्रतियोगिता में विजेता बनने के लिए आपको बधाई.

    aartisharma के द्वारा
    February 16, 2014

    हार्दिक आभार आदरणीय सद्गुरुजी..सादर

aartisharma के द्वारा
February 14, 2014

रचना सराहने के लिए और मेरे ब्लॉग पर पधारने के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया आदरणीया yamunapathak जी…आभार

yamunapathak के द्वारा
February 14, 2014

आरतीजी आपका प्यार ही जीवन साथी बना यह बहुत अच्छी बात हुई भावाभिव्यक्ति बहुत सुन्दर है. साभार

Madan Mohan saxena के द्वारा
February 7, 2014

सुन्दर प्रेममयी रचना आभार कभी इधर भी पधारें

    aartisharma के द्वारा
    February 7, 2014

    आपका तहेदिल से शुक्रिया Madan Mohan saxena जी..


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